Varanasi Samagam
8:21 AM
Wednesday, March 28, 2018
Thought
1:12 AM
जब एक छिपकली कर सकती है, तो हम क्यों नहीं?
जब एक छिपकली कर सकती है, तो हम क्यों नहीं?
[यह जापान में घटी, एक सच्ची घटना है।]
अपने मकान का नवीनीकरण करने के लिये, एक जापानी अपने मकान की दीवारों को तोड़ रहा था। जापान में लकड़ी की दीवारों के बीच ख़ाली जगह होती हैं, यानी दीवारें अंदर से पोली होती हैं।
जब वह लकड़ी की दीवारों को चीर-तोड़ रहा था, तभी उसने देखा कि दीवार के अंदर की तरफ लकड़ी पर एक छिपकली, बाहर से उसके पैर पर ठुकी कील के कारण, एक ही जगह पर जमी पड़ी है।
जब उसने यह दृश्य देखा तो उसे बहुत दया आई पर साथ ही वह जिज्ञासु भी हो गया। जब उसने आगे जाँच की तो पाया कि वह कील तो उसके मकान बनते समय पाँच साल पहले ठोंका गई थी!
एक छिपकली इस स्थिति में पाँच साल तक जीवित थी! दीवार के अँधेरे पार्टीशन के बीच, बिना हिले-डुले? यह अविश्वसनीय, असंभव और चौंका देने वाला था!
उसकी समझ से यह परे था कि एक छिपकली, जिसका एक पैर, एक ही स्थान पर पिछले पाँच साल से कील के कारण चिपका हुआ था और जो अपनी जगह से एक इंच भी न हिली थी, वह कैसे जीवित रह सकती है?
अब उसने यह देखने के लिये कि वह छिपकली अब तक क्या करती रही है और कैसे अपने भोजन की जरुरत को पूरा करती रही है, अपना काम रोक दिया।
थोड़ी ही देर बाद, पता नहीं कहाँ से, एक दूसरी छिपकली प्रकट हुई, वह अपने मुँह में भोजन दबाये हुये थी - उस फँसी हुई छिपकली को खिलाने के लिये! उफ़्फ़! वह सन्न रह गया! यह दृश्य उसके दिल को अंदर तक छू गया!
एक छिपकली, जिसका एक पैर कील से ठुका हुआ था, को, एक दूसरी छिपकली पिछले पाँच साल से भोजन खिला रही थी!
अद्भुत! दूसरी छिपकली ने अपने साथी के बचने की उम्मीद नहीं छोड़ी थी, वह पहली छिपकली को पिछले पाँच साल से भोजन करवा रही थी।
अजीब है, एक छोटा-सा जंतु तो यह कर सकता है, पर हम मनुष्य जैसे प्राणी, जिसे बुद्धि में सर्वश्रेष्ठ होने का आशीर्वाद मिला हुआ है, नहीं कर सकता!
*कृपया अपने प्रिय लोगों को कभी न छोड़ें! लोगों को उनकी तकलीफ़ के समय अपनी पीठ न दिखायें! अपने आप को महाज्ञानी या सर्वश्रेष्ठ समझने की भूल न करें! आज आप सौभाग्यशाली हो सकते हैं पर कल तो अनिश्चित ही है और कल चीज़ें बदल भी सकती हैं!*
प्रकृति ने हमारी अंगुलियों के बीच शायद जगह भी इसीलिये दी है ताकि हम किसी दूसरे का हाथ थाम सकें!
*आप आज किसी का साथ दीजिये, कल कोई-न-कोई दूसरा आपको साथ दे देगा!*
धर्म चाहे जो भी हो बस अच्छे इंसान बनो, मालिक हमारे कर्म देखता है धर्म नहीं
मदद करिये इंसान की हर जीव की मानवता ही सबसे बड़ा धर्म है इसी से अल्लाह खुश होता है इसी से भगवान अल्लाह के वास्ते मुझे दुआओं में याद रखना✍
Tuesday, March 27, 2018
Friday, March 23, 2018
Documentary
12:38 PM
Nirankari Baba Hardev Singh Ji Maharaj Documentry

Nirankari Baba Hardev Singh Ji Maharaj Documentry
Thursday, March 22, 2018
Thought
10:58 PM
जैसा खाओ अन्न , वैसा बनेगा मन
जैसा खाओ अन्न , वैसा बनेगा मन ।
पुरानी कहावत है आप सब जानते हैं यदि चोरी रिश्वत हेराफेरी ब्लैक मार्केटिंग स्मगलिंग आदि आदि पाप करके कोई धन कमाए और उस धन से भोजन खरीद कर खाए , तो निश्चित रुप से उसका चित्त मलिन होगा और बुद्धि भी नष्ट होगी । धीरे-धीरे उसका प्रभाव उसके परिवार पर पड़ेगा , और पूरा परिवार भी धीरे-धीरे नष्ट हो जाएगा । इसलिए मेहनत से ईमानदारी से बुद्धिमत्ता से पुण्य कर्म करके धन कमाएँ । विद्या का अध्यापन करें , देश की रक्षा करें , सेना पुलिस आदि में जाएं , व्यापार करें न्याय से करें , ईमानदारी से व्यापार करें , अच्छी वस्तु बेचकर धन कमाएं। अंडे शराब बेच कर के नहीं, मांस बेच कर नहीं ।
तो इस प्रकार पुण्य से कमाये धन से आपका मन बुद्धि उत्तम बनेगा । परिवार और बच्चों पर अच्छे संस्कार पड़ेंगे , और आपका परिवार फलेगा फूलेगा। सब प्रकार से संपन्न और सुखी रहेगा।
NIRANKARI DUNIYA
Wednesday, March 21, 2018
Shayari
11:19 PM
हजारों गलतियां माफ़ करने वाले;
Shayari
12:20 AM
धन निरंकार जी
Monday, March 19, 2018
Thought
10:22 PM



















































































































